देवशयनी एकादशी: क्या है इसका महत्व और कुछ अनसुनी मान्यताएं देवशयनी एकादशी आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष में आती है और हिंदू धर्म में इसका बहुत गहरा महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस पवित्र दिन से भगवान विष्णु अगले चार महीनों के लिए क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर 'योग निद्रा' (गहरी नींद) में चले जाते हैं।

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इन चार महीनों के समय को 'चातुर्मास' कहा जाता है। क्योंकि दुनिया के पालनहार भगवान विष्णु शयन काल (आराम) में होते हैं, इसलिए इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, और सगाई जैसे कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।

देवशयनी एकादशी से जुड़ी 4 रोचक और कम प्रचलित मान्यताएं

आमतौर पर लोग सिर्फ इतना जानते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु सो जाते हैं और शुभ काम बंद हो जाते हैं। लेकिन इस एकादशी से जुड़ी कुछ ऐसी खास मान्यताएं भी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आइए जानते हैं ये रहस्य:

1. सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव के पास

बहुत कम लोगों को यह पता है कि जब भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में जाते हैं, तो वो इस पूरी दुनिया और ब्रह्मांड को चलाने की जिम्मेदारी भगवान शिव को सौंप देते हैं। यही कारण है कि चातुर्मास शुरू होते ही सावन का महीना आता है और पूरी दुनिया में महादेव की विशेष पूजा होती है।

2. पाताल लोक में निवास का रहस्य

एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने दैत्यराज बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि वो साल के चार महीने पाताल लोक में उनके साथ रहेंगे। इसलिए यह भी माना जाता है कि इन चार महीनों में श्री हरि क्षीरसागर के साथ-साथ पाताल लोक में राजा बलि के महल में भी निवास करते हैं।

3. सूखे और संकट से मुक्ति (राजा मान्धाता की कथा)

एक पुरानी मान्यता है कि प्राचीन काल में राजा मान्धाता के राज्य में लगातार तीन साल तक भयंकर सूखा पड़ा था। तब महर्षि अंगिरा के कहने पर राजा ने अपनी प्रजा के साथ इसी देवशयनी एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के अचूक प्रभाव से राज्य में झमाझम बारिश हुई और सारा संकट टल गया।

4. छाता, जूते और कलश के दान का अचूक उपाय

लोग अक्सर इस दिन फल या अन्न का दान करते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार इस दिन छाता, जूते (या खड़ाऊं), और पानी से भरा कलश दान करना एक बहुत ही अचूक उपाय माना गया है। कहते हैं कि ऐसा करने से जीवन की बड़ी से बड़ी रुकावटें दूर हो जाती हैं और ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

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